The Vision of Śiva· 5.92 / 110

The Vision of Śiva5.92

5.92
अविद्यायोगतो वापि शाक्तरूपत्वतोऽपिवा । ज्ञानस्यापि बहीरूपे शब्दरूपेऽपिवा तथा ॥९२॥
avidyāyogato vāpi śāktarūpatvato'pivā | jñānasyāpi bahīrūpe śabdarūpe'pivā tathā
— अविद्या के योग से ; — अथवा ; — शाक्त-रूपत्व से ; — अथवा ; — ज्ञान का भी ; — बाह्य रूप में ; — शब्द-रूप में अथवा ; — उसी प्रकार

अथवा अविद्या के योग से, अथवा शाक्त-रूपत्व (शिव की शक्ति-स्वरूप होने) से, अथवा अन्यथा — और ज्ञान का भी, चाहे बाह्य रूप में, अथवा शब्द-रूप में, उसी प्रकार (वही अमूर्त चित्-आधार रहता है)।