The Vision of Śiva· 5.89 / 110

The Vision of Śiva5.89

5.89
एवमिन्द्रियशक्तीनां ज्ञानमन्तः प्रवेशनात् । सामान्या मूर्तता व्याप्ता ह्यमूर्तत्वं तदग्रतः ॥८९॥
evamindriyaśaktīnāṃ jñānamantaḥ praveśanāt | sāmānyā mūrtatā vyāptā hyamūrtatvaṃ tadagrataḥ
— इस प्रकार ; — इन्द्रिय-शक्तियों का ; — ज्ञान ; — भीतर ; — प्रवेश के कारण ; — सामान्य ; — मूर्तता ; — व्याप्त ; — क्योंकि ; — अमूर्तता ; — उससे पूर्ववर्ती (अधिष्ठायक)

इस प्रकार इन्द्रिय-शक्तियों का ज्ञान, (विषय के) भीतर प्रवेश के कारण, (दर्शाता है कि) सामान्य मूर्तता (चित् से) व्याप्त है; क्योंकि अमूर्तता उससे पूर्ववर्ती (और अधिष्ठायक) है।