एवमिन्द्रियशक्तीनां ज्ञानमन्तः प्रवेशनात् ।
सामान्या मूर्तता व्याप्ता ह्यमूर्तत्वं तदग्रतः ॥८९॥
evamindriyaśaktīnāṃ jñānamantaḥ praveśanāt |
sāmānyā mūrtatā vyāptā hyamūrtatvaṃ tadagrataḥ
इस प्रकार इन्द्रिय-शक्तियों का ज्ञान, (विषय के) भीतर प्रवेश के कारण, (दर्शाता है कि) सामान्य मूर्तता (चित् से) व्याप्त है; क्योंकि अमूर्तता उससे पूर्ववर्ती (और अधिष्ठायक) है।