The Vision of Śiva· 5.90 / 110

The Vision of Śiva5.90

5.90
कथमाकारघटना व्योम्नि नित्येव नीलता । आत्मेच्छातः स्थिता भावाः स्थितैवासावमूर्तता ॥९०॥
kathamākāraghaṭanā vyomni nityeva nīlatā | ātmecchātaḥ sthitā bhāvāḥ sthitaivāsāvamūrtatā
— कैसे ; — आकारों की घटना ; — आकाश में ; — मानो नित्य ; — नीलता ; — आत्मा की इच्छा से ; — स्थित ; — भाव ; — स्थित ही ; — यह ; — अमूर्तता

अन्यथा आकारों की घटना (वस्तुओं के आकार बनना) कैसे (हो), अथवा आकाश में मानो नित्य नीलता (कैसे प्रतीत हो)? भाव आत्मा की इच्छा से स्थित हैं; (अतः) यह अमूर्तता स्थित ही है।