The Vision of Śiva· 5.80 / 110

The Vision of Śiva5.80

5.80
भूकम्पनाच्च शेषादिचलनाच्चेन्न सर्वतः । गमागमेन वायवादेः कान्या भवति चेतना ॥८०॥
bhūkampanācca śeṣādicalanāccenna sarvataḥ | gamāgamena vāyavādeḥ kānyā bhavati cetanā
— भूमि के कम्पन से ; — और ; — शेष आदि के चलन से ; — यदि (पूछो) ; — नहीं ; — सबसे (समान रूप से) ; — आने-जाने से ; — वायु आदि के ; — कौन-सी अन्य ; — है ; — चेतना

और (यदि पूछो कि) भूमि के कम्पन से, शेष आदि के चलन से (यह होता है) — तो (उत्तर:) सबसे (समान रूप से) नहीं; (अपितु) वायु आदि के आने-जाने में (उनकी अपनी अन्तर्निहित) चेतना के अतिरिक्त कौन-सी अन्य (व्याख्या हो सकती है)?