नौतरभ्रान्तिनाशादौ सम्यग्दृष्टिसमुद्गमात् ।
यमसैनिकसद्दृष्टिधरादेश्चलनोद्गमात् ॥७९॥
nautarabhrāntināśādau samyagdṛṣṭisamudgamāt |
yamasainikasaddṛṣṭidharādeścalanodgamāt
(संवित् का सर्वज्ञत्व इससे भी पुष्ट होता है:) नौका से तरने आदि के भ्रम के नाश में, सम्यक् दृष्टि के उदय से; (और) मरण-काल में यम के सैनिकों आदि को देखने वालों के कम्पन के उद्गम से (— ऐसे अनुभव अदृष्ट तक पहुँचने वाले ज्ञान को बतलाते हैं)।