The Vision of Śiva· 5.79 / 110

The Vision of Śiva5.79

5.79
नौतरभ्रान्तिनाशादौ सम्यग्दृष्टिसमुद्गमात् । यमसैनिकसद्दृष्टिधरादेश्चलनोद्गमात् ॥७९॥
nautarabhrāntināśādau samyagdṛṣṭisamudgamāt | yamasainikasaddṛṣṭidharādeścalanodgamāt
— नौका से तरने आदि के भ्रम के नाश में ; — सम्यक् दृष्टि के उदय से ; — यम के सैनिकों आदि को देखने वालों के ; — कम्पन के उद्गम से

(संवित् का सर्वज्ञत्व इससे भी पुष्ट होता है:) नौका से तरने आदि के भ्रम के नाश में, सम्यक् दृष्टि के उदय से; (और) मरण-काल में यम के सैनिकों आदि को देखने वालों के कम्पन के उद्गम से (— ऐसे अनुभव अदृष्ट तक पहुँचने वाले ज्ञान को बतलाते हैं)।