The Vision of Śiva· 5.8 / 110

The Vision of Śiva5.8

5.8
स्वल्पतेजसि दार्ढ्याद्वा सर्वत्र शिवतुल्यता । भवेदिच्छादिविषये सर्वत्र प्रविसारिणी ॥८॥
svalpatejasi dārḍhyādvā sarvatra śivatulyatā | bhavedicchādiviṣaye sarvatra pravisāriṇī
— अल्प तेज में ; — अथवा (अग्नि की) दृढ़ता से ; — सर्वत्र ; — शिव से तुल्यता ; — होगी ; — इच्छा आदि के विषय में ; — सर्वत्र ; — प्रसरित होने वाली

अल्प तेज में भी, अथवा (अग्नि की) दृढ़ता के कारण, सर्वत्र शिव से तुल्यता रहती है; (ऐसी तुल्यता) इच्छा आदि के विषय में सर्वत्र प्रसरित होने वाली होगी।