The Vision of Śiva· 5.7 / 110

The Vision of Śiva5.7

5.7
घटादीनां समस्तानामिच्छादेरल्पतास्ति चेत् । अन्यत्र देहे सर्पादौ दीपादौ नाग्निताल्पके ॥७॥
ghaṭādīnāṃ samastānāmicchāderalpatāsti cet | anyatra dehe sarpādau dīpādau nāgnitālpake
— घट आदि की ; — समस्त की ; — इच्छा आदि की ; — अल्पता ; — यदि हो ; — अन्यत्र ; — देह में ; — सर्प आदि में ; — दीप आदि में ; — नहीं (अल्प) ; — अग्नित्व ; — छोटे (दीप) में

यदि (आक्षेप करो कि) समस्त घट आदि में इच्छा आदि की अल्पता है, (जबकि) अन्यत्र — देह में, सर्प आदि में — (अधिकता है) — (तो उत्तर:) दीप आदि में अग्नित्व छोटे (दीप) में अल्प नहीं होता।