घटादीनां समस्तानामिच्छादेरल्पतास्ति चेत् ।
अन्यत्र देहे सर्पादौ दीपादौ नाग्निताल्पके ॥७॥
ghaṭādīnāṃ samastānāmicchāderalpatāsti cet |
anyatra dehe sarpādau dīpādau nāgnitālpake
यदि (आक्षेप करो कि) समस्त घट आदि में इच्छा आदि की अल्पता है, (जबकि) अन्यत्र — देह में, सर्प आदि में — (अधिकता है) — (तो उत्तर:) दीप आदि में अग्नित्व छोटे (दीप) में अल्प नहीं होता।