The Vision of Śiva· 5.6 / 110

The Vision of Śiva5.6

5.6
सर्वे स्वात्मपरिच्छेदवन्तो नित्यमवस्थिताः । विकासाह्लादवन्तश्च सर्वे निर्वृतियोगिनः ॥६॥
sarve svātmaparicchedavanto nityamavasthitāḥ | vikāsāhlādavantaśca sarve nirvṛtiyoginaḥ
— सब ; — स्वात्म-परिच्छेद वाले ; — नित्य ; — अवस्थित ; — और विकास-आह्लाद वाले ; — सब ; — निर्वृति (आनन्द) से युक्त

सब स्वात्म-परिच्छेद वाले, नित्य अवस्थित हैं; और सब विकास-आह्लाद वाले, सब निर्वृति (आनन्द) से युक्त हैं।