अनुमानं न चास्तीति पक्षादिर्नोपयुज्यते ।
गोपालघटिकान्यैश्च घटिता न ह्यसम्भवात् ॥६७॥
anumānaṃ na cāstīti pakṣādirnopayujyate |
gopālaghaṭikānyaiśca ghaṭitā na hyasambhavāt
इस प्रकार (यथार्थवादियों के अभिप्राय में) अनुमान है ही नहीं; (अतः) पक्ष आदि उपयोगी नहीं; और 'गोपाल-घटिका' आदि (मोटे दृष्टान्तों) से घटित (अनुमान-सामग्री भी) नहीं (टिकती), क्योंकि (चित् के बिना उसका) असम्भव है।