The Vision of Śiva· 5.66 / 110

The Vision of Śiva5.66

5.66
तस्यापि सर्वदेश्यत्वान्निश्चयः केन लभ्यते । भोजनादेरचेष्टत्वे व्यवहारविलोपिता ॥६६॥
tasyāpi sarvadeśyatvānniścayaḥ kena labhyate | bhojanāderaceṣṭatve vyavahāravilopitā
— उस (स्फोट) का भी ; — सर्वत्र निर्देश्य होने के कारण ; — निश्चय ; — किससे ; — प्राप्त हो ; — भोजन आदि की ; — चेष्टा न होने पर ; — व्यवहार का विलोप

उस (स्फोट) का भी सर्वत्र निर्देश्य (होने) के कारण निश्चय किससे प्राप्त हो? और (यदि वास्तविक विषयों पर आधारित) भोजन आदि की (सार्थक) चेष्टा न हो, तो (समस्त) व्यवहार का विलोप (हो जाएगा)।