धूमादग्निप्रतीतिश्च न चायं नियमः स्थितः ।
कक्षभूर्जादिजो वह्निर्गुहाकारे ज्वलन् गृहे ॥५८॥
dhūmādagnipratītiśca na cāyaṃ niyamaḥ sthitaḥ |
kakṣabhūrjādijo vahnirguhākāre jvalan gṛhe
और धूम से अग्नि-प्रतीति — यह नियम (भी) स्थित नहीं; (देखो) घास, भोजपत्र आदि से उत्पन्न अग्नि, गुफा-जैसे घर में जलती हुई (— और उसका परिणाम देखो)।