The Vision of Śiva· 5.50 / 110

The Vision of Śiva5.50

5.50
सम्बन्धो ग्रहकाले तु नचोर्ध्वावयवैर्भवेत् । वह्नेर्दूरतरस्थित्या वह्निश्लिष्टेष्वलक्ष्यता ॥५०॥
sambandho grahakāle tu nacordhvāvayavairbhavet | vahnerdūratarasthityā vahniśliṣṭeṣvalakṣyatā
— सम्बन्ध ; — ग्रहण के समय ; — किन्तु ; — नहीं ; — ऊर्ध्व (ऊपरी) अवयवों के साथ ; — होगा ; — अग्नि के ; — अत्यन्त दूर स्थित होने से ; — अग्नि-संश्लिष्ट (अवयवों) में ; — अलक्ष्यता (अदृश्यता)

और ग्रहण के समय (धूम के) ऊर्ध्व (ऊपरी) अवयवों के साथ (अग्नि का) सम्बन्ध नहीं होगा; और अग्नि के अत्यन्त दूर स्थित होने से, अग्नि-संश्लिष्ट (निकटवर्ती धूम-) अवयवों में अलक्ष्यता (अदृश्यता है)।