The Vision of Śiva· 5.46 / 110

The Vision of Śiva5.46

5.46
देशोऽपि न गृहीतोऽत्र धूमलेखानुरूपतः । नचापि निम्ने ह्रस्वे वा निश्चयोऽत्रावगम्यते ॥४६॥
deśo'pi na gṛhīto'tra dhūmalekhānurūpataḥ | nacāpi nimne hrasve vā niścayo'trāvagamyate
— देश भी ; — नहीं ग्रहीत ; — यहाँ ; — धूम-रेखा के अनुरूप ; — और न ही ; — निम्न (गहरे) में ; — ह्रस्व (छोटे) में अथवा ; — निश्चय ; — यहाँ ; — होता

न तो यहाँ धूम-रेखा के अनुरूप देश (अग्नि का स्थान) ग्रहीत हुआ; और न ही यहाँ यह निश्चय होता है कि (अग्नि) निम्न (गहरे) स्थान में है या ह्रस्व (छोटे) में (— अतः अनुमान अनिश्चित है)।