देशोऽपि न गृहीतोऽत्र धूमलेखानुरूपतः ।
नचापि निम्ने ह्रस्वे वा निश्चयोऽत्रावगम्यते ॥४६॥
deśo'pi na gṛhīto'tra dhūmalekhānurūpataḥ |
nacāpi nimne hrasve vā niścayo'trāvagamyate
न तो यहाँ धूम-रेखा के अनुरूप देश (अग्नि का स्थान) ग्रहीत हुआ; और न ही यहाँ यह निश्चय होता है कि (अग्नि) निम्न (गहरे) स्थान में है या ह्रस्व (छोटे) में (— अतः अनुमान अनिश्चित है)।