The Vision of Śiva· 5.42 / 110

The Vision of Śiva5.42

5.42
सर्वज्ञत्वमप्रवेशाद्व्यवधानादियोगतः । नचान्यावयवत्वेन तदन्येष्वनुमानता ॥४२॥
sarvajñatvamapraveśādvyavadhānādiyogataḥ | nacānyāvayavatvena tadanyeṣvanumānatā
— सर्वज्ञत्व (अपेक्षित) ; — (चक्षु के) प्रवेश न करने के कारण ; — व्यवधान आदि के योग के कारण ; — और नहीं ; — अन्य-अवयव होने के नाते ; — उन अन्यों (अदृष्ट) में ; — अनुमानता (अनुमेयता)

(समग्र को ग्रहण करने के लिए) सर्वज्ञत्व (अपेक्षित होगा), क्योंकि (चक्षु विषय में) प्रवेश नहीं करती और व्यवधान आदि का योग है; और न (दृष्ट तल के) अन्य-अवयव होने के नाते उन अन्यों (अदृष्ट अवयवों) में अनुमानता (अनुमेयता है)।