सर्वज्ञत्वमप्रवेशाद्व्यवधानादियोगतः ।
नचान्यावयवत्वेन तदन्येष्वनुमानता ॥४२॥
sarvajñatvamapraveśādvyavadhānādiyogataḥ |
nacānyāvayavatvena tadanyeṣvanumānatā
(समग्र को ग्रहण करने के लिए) सर्वज्ञत्व (अपेक्षित होगा), क्योंकि (चक्षु विषय में) प्रवेश नहीं करती और व्यवधान आदि का योग है; और न (दृष्ट तल के) अन्य-अवयव होने के नाते उन अन्यों (अदृष्ट अवयवों) में अनुमानता (अनुमेयता है)।