न चान्यावयवैः सार्द्धं सम्बन्धग्रहणं पुरा ।
तस्मान्नान्येन गृह्यन्ते प्रत्यक्षेण कदाचन ॥४३॥
na cānyāvayavaiḥ sārddhaṃ sambandhagrahaṇaṃ purā |
tasmānnānyena gṛhyante pratyakṣeṇa kadācana
और न ही पहले (दृष्ट तल का) अन्य अवयवों के साथ सम्बन्ध-ग्रहण (हुआ था); इसलिए वे (अदृष्ट अवयव) प्रत्यक्ष द्वारा अन्य (किसी साधन) से कभी ग्रहीत नहीं होते (केवल चित् ही ग्रहण करती है)।