The Vision of Śiva· 5.43 / 110

The Vision of Śiva5.43

5.43
न चान्यावयवैः सार्द्धं सम्बन्धग्रहणं पुरा । तस्मान्नान्येन गृह्यन्ते प्रत्यक्षेण कदाचन ॥४३॥
na cānyāvayavaiḥ sārddhaṃ sambandhagrahaṇaṃ purā | tasmānnānyena gṛhyante pratyakṣeṇa kadācana
— और नहीं ; — अन्य अवयवों के साथ ; — सम्बन्ध-ग्रहण ; — पहले ; — इसलिए ; — अन्य (साधन) से नहीं ; — ग्रहीत होते ; — प्रत्यक्ष द्वारा ; — कभी

और न ही पहले (दृष्ट तल का) अन्य अवयवों के साथ सम्बन्ध-ग्रहण (हुआ था); इसलिए वे (अदृष्ट अवयव) प्रत्यक्ष द्वारा अन्य (किसी साधन) से कभी ग्रहीत नहीं होते (केवल चित् ही ग्रहण करती है)।