The Vision of Śiva· 5.39 / 110

The Vision of Śiva5.39

5.39
स्वच्छाकर्मविमर्शेन स्वेच्छाकर्मत्वमादृतम् । सर्वे पदार्थरूपेण सामान्येनार्थवत्तया ॥३९॥
svacchākarmavimarśena svecchākarmatvamādṛtam | sarve padārtharūpeṇa sāmānyenārthavattayā
— स्वच्छन्द (स्व-इच्छित) कर्म के विमर्श से ; — स्व-इच्छा-कर्मत्व ; — स्वीकृत ; — सब ; — पदार्थ-रूप होने से ; — सामान्यतः ; — अर्थवान् (सार्थक) होने के कारण

स्वच्छन्द (स्व-इच्छित) कर्म के विमर्श से स्व-इच्छा-कर्मत्व (सब में) स्वीकृत है; सब (वस्तुएँ) पदार्थ-रूप होने से, सामान्यतः अर्थवान् (सार्थक) होने के कारण (इस स्व-इच्छ कर्तृत्व में भागी हैं)।