The Vision of Śiva· 5.37 / 110

The Vision of Śiva5.37

5.37
इच्छावत्त्वमनेनैव न्यायेनास्य निजां क्रियाम् । अनिच्छुर्न करोत्येवमत एवास्ति निर्वृतिः ॥३७॥
icchāvattvamanenaiva nyāyenāsya nijāṃ kriyām | anicchurna karotyevamata evāsti nirvṛtiḥ
— इच्छावत्त्व ; — इसी न्याय से ; — इसका ; — अपनी क्रिया ; — इच्छारहित ; — नहीं करता ; — इस प्रकार ; — इसी कारण ; — है निर्वृति (आनन्द)

इसी न्याय से इसका (घट का) इच्छावत्त्व (सिद्ध है, क्योंकि वह) अपनी क्रिया (करता है); इच्छारहित कुछ नहीं करता। इसी कारण (उसमें) निर्वृति (आनन्द) भी है।