The Vision of Śiva· 5.30 / 110

The Vision of Śiva5.30

5.30
अन्तर्विंशति चेच्छक्तिरन्तरप्युपलम्भनम् । अप्रवेशान्न मनसः सम्बन्ध उपपद्यते ॥३०॥
antarviṃśati cecchaktirantarapyupalambhanam | apraveśānna manasaḥ sambandha upapadyate
— भीतर प्रवेश करती है ; — यदि ; — शक्ति ; — भीतर भी ; — उपलम्भ (ग्रहण) ; — (प्रवेश न करने) के कारण ; — नहीं ; — मन का ; — सम्बन्ध ; — उपपन्न होता

यदि (कहो कि) शक्ति भीतर प्रवेश करती है — तो भीतर भी उपलम्भ (ग्रहण) (होना चाहिए, जो असंगत है); और मन के (विषय में) प्रवेश न करने से मन का (विषय से) सम्बन्ध उपपन्न नहीं होता (— केवल चित् ही उन्हें जोड़ती है)।