The Vision of Śiva· 5.3 / 110

The Vision of Śiva5.3

5.3
न जातुचिद्विभेदित्वं तथा तदुपकर्ण्यताम् । चित्त्वात् सर्वपदार्थानां विशेषः केन कथ्यताम् ॥३॥
na jātucidvibheditvaṃ tathā tadupakarṇyatām | cittvāt sarvapadārthānāṃ viśeṣaḥ kena kathyatām
— कभी भी नहीं ; — विभेदित्व ; — इस प्रकार ; — इसे सुनो ; — चित्-स्वरूप होने से ; — समस्त पदार्थों के ; — विशेष (भेद) ; — किसके द्वारा ; — कहा जाए

कभी भी (वास्तविक) विभेदित्व नहीं — इसे इस प्रकार सुनो: समस्त पदार्थों के चित्-स्वरूप होने से, (उनमें) विशेष (भेद) किसके द्वारा कहा जाए?