विभेदेष्वपि तद्व्याप्त्याभेदेष्वप्येकता स्थिता ।
इच्छावन्तः सर्व एव व्यापकाश्च समस्तकाः ॥४॥
vibhedeṣvapi tadvyāptyābhedeṣvapyekatā sthitā |
icchāvantaḥ sarva eva vyāpakāśca samastakāḥ
विभेदों में भी, और अभेदों में भी, उसकी (शिव की) व्याप्ति से एकता स्थित है। सब ही इच्छावान्, व्यापक और समस्त (पूर्ण) हैं।