The Vision of Śiva· 5.4 / 110

The Vision of Śiva5.4

5.4
विभेदेष्वपि तद्व्याप्त्याभेदेष्वप्येकता स्थिता । इच्छावन्तः सर्व एव व्यापकाश्च समस्तकाः ॥४॥
vibhedeṣvapi tadvyāptyābhedeṣvapyekatā sthitā | icchāvantaḥ sarva eva vyāpakāśca samastakāḥ
— विभेदों में भी ; — उसकी (शिव की) व्याप्ति से ; — अभेदों में भी ; — एकता ; — स्थित ; — इच्छावान् ; — सब ही ; — व्यापक ; — और समस्त (पूर्ण)

विभेदों में भी, और अभेदों में भी, उसकी (शिव की) व्याप्ति से एकता स्थित है। सब ही इच्छावान्, व्यापक और समस्त (पूर्ण) हैं।