The Vision of Śiva5.2
तदपि सर्वदास्तीह तदर्थमिह वर्ण्यते ।
यथा सर्वेषु भावेषु समतास्त्येकरूपता ॥२॥
tadapi sarvadāstīha tadarthamiha varṇyate |
yathā sarveṣu bhāveṣu samatāstyekarūpatā
— वह (एकता) भी ; — सदा ; — है ; — यहाँ ; — उसी प्रयोजन के लिए ; — यहाँ ; — वर्णन किया जाता है ; — किस प्रकार ; — समस्त भावों में ; — समता ; — है ; — एक-रूपता वह (एकता) भी यहाँ सदा है; उसी प्रयोजन के लिए यहाँ वर्णन किया जाता है कि किस प्रकार समस्त भावों में समता है — एक-रूपता।