The Vision of Śiva· 5.1 / 110

The Vision of Śiva5.1

5.1
अथ चेत् सर्वभावानां न विना तत्त्वमेककम् । समन्वयोऽस्ति तदिदं कथमैक्यं विभेदितम् ॥१॥
atha cet sarvabhāvānāṃ na vinā tattvamekakam | samanvayo'sti tadidaṃ kathamaikyaṃ vibheditam
— अब यदि (कोई पूछे) ; — समस्त भावों का ; — नहीं बिना ; — एक ही तत्त्व ; — समन्वय ; — है ; — तो ऐसा होने पर यह (प्रश्न) ; — कैसे ; — एकता ; — विभेदित (नाना-रूप)

अब यदि (कोई पूछे:) समस्त भावों का समन्वय एक ही तत्त्व के बिना नहीं होता — तो ऐसा होने पर यह एकता विभेदित (नाना-रूप) कैसे (प्रतीत होती) है?