अथ चेत् सर्वभावानां न विना तत्त्वमेककम् ।
समन्वयोऽस्ति तदिदं कथमैक्यं विभेदितम् ॥१॥
atha cet sarvabhāvānāṃ na vinā tattvamekakam |
samanvayo'sti tadidaṃ kathamaikyaṃ vibheditam
अब यदि (कोई पूछे:) समस्त भावों का समन्वय एक ही तत्त्व के बिना नहीं होता — तो ऐसा होने पर यह एकता विभेदित (नाना-रूप) कैसे (प्रतीत होती) है?