The Vision of Śiva· 4.124 / 124

The Vision of Śiva4.124

4.124
शिविकोद्वाहकानां च न्याय एषोऽनुवर्तताम् । परचित्तपरिज्ञानात्तस्माज्ज्ञेयैक्यता ततः ॥१२४॥
śivikodvāhakānāṃ ca nyāya eṣo'nuvartatām | paracittaparijñānāttasmājjñeyaikyatā tataḥ
— शिविका-उद्वाहकों (पालकी ढोने वालों) का ; — और ; — न्याय (दृष्टान्त) ; — यह ; — लागू होवे ; — पर-चित्त-परिज्ञान (दूसरे के मन के ज्ञान) से ; — उससे ; — ज्ञेय की एकता ; — उससे (सबकी शिवता)

और शिविका-उद्वाहकों (पालकी ढोने वालों, जो एक भार को सम्मिलित प्रयत्न से उठाते हैं) का यह न्याय (दृष्टान्त) लागू होवे; पर-चित्त-परिज्ञान (दूसरे के मन का ज्ञान) से भी (यही सिद्ध होता है) — इससे ज्ञेय की एकता, और उससे (सबकी शिवता)।