The Vision of Śiva· 4.123 / 124

The Vision of Śiva4.123

4.123
परस्परेण चाप्यत्र तेषां रूपेण वान्यथा । तस्मात् समस्तभावानामैक्येनैवास्ति संगमः ॥१२३॥
paraspareṇa cāpyatra teṣāṃ rūpeṇa vānyathā | tasmāt samastabhāvānāmaikyenaivāsti saṃgamaḥ
— परस्पर ; — और भी ; — यहाँ ; — उनका (वस्तुओं का) ; — रूप से ; — अथवा अन्यथा ; — इसलिए ; — समस्त भावों का ; — एकता से ही ; — है ; — संगम

और यहाँ भी, चाहे वे (वस्तुएँ) परस्पर अपने रूप से (जुड़ें), अथवा अन्यथा — इसलिए समस्त भावों का संगम एकता से ही होता है।