The Vision of Śiva· 5.24 / 110

The Vision of Śiva5.24

5.24
गोलकं न प्रयातीह शक्तेरव्यतिरेकतः । शक्तिमद्भोगतायां वा तत्रैव यदि वेदनम् ॥२४॥
golakaṃ na prayātīha śakteravyatirekataḥ | śaktimadbhogatāyāṃ vā tatraiva yadi vedanam
— गोलक ; — नहीं जाता ; — यहाँ ; — शक्ति के ; — अव्यतिरेक के कारण ; — शक्तिमान् के भोग (अनुभव) में ; — अथवा ; — वहीं ; — यदि ; — वेदन (ज्ञान)

नेत्र-गोलक यहाँ (विषय तक) नहीं जाता; और (उसकी) शक्ति (भी अपने आश्रय से) अव्यतिरिक्त होने के कारण (नहीं जा सकती)। अथवा यदि (कहो कि) वहीं (विषय में) शक्तिमान् के भोग (अनुभव) में वेदन (ज्ञान होता है — तो आगे का प्रसंग देखो)।