गोलकं न प्रयातीह शक्तेरव्यतिरेकतः ।
शक्तिमद्भोगतायां वा तत्रैव यदि वेदनम् ॥२४॥
golakaṃ na prayātīha śakteravyatirekataḥ |
śaktimadbhogatāyāṃ vā tatraiva yadi vedanam
नेत्र-गोलक यहाँ (विषय तक) नहीं जाता; और (उसकी) शक्ति (भी अपने आश्रय से) अव्यतिरिक्त होने के कारण (नहीं जा सकती)। अथवा यदि (कहो कि) वहीं (विषय में) शक्तिमान् के भोग (अनुभव) में वेदन (ज्ञान होता है — तो आगे का प्रसंग देखो)।