The Vision of Śiva· 5.21 / 110

The Vision of Śiva5.21

5.21
तथा वा शिवतत्त्वस्य सम्भूतेरथवातथा । एकैकशोऽस्ति चैतन्यमनभिव्यक्तरूपकम् ॥२१॥
tathā vā śivatattvasya sambhūterathavātathā | ekaikaśo'sti caitanyamanabhivyaktarūpakam
— अथवा इस प्रकार ; — शिव-तत्त्व की ; — सम्भूति (स्वतः-उत्पत्ति) से ; — अथवा वैसे/अन्यथा ; — प्रत्येक एक-एक में ; — है ; — चैतन्य ; — अनभिव्यक्त रूप में

अथवा इस प्रकार — शिव-तत्त्व की सम्भूति (स्वतः-उत्पत्ति) से, चाहे वैसे या अन्यथा — प्रत्येक एक-एक (वस्तु) में चैतन्य है, (किन्तु) अनभिव्यक्त रूप में।