The Vision of Śiva· 5.20 / 110

The Vision of Śiva5.20

5.20
प्रत्येकं परमाणौ चेच्चैतन्येऽनेकचेतनाः । घटादयः प्रसज्यन्ते प्रमाणुकथा नहि ॥२०॥
pratyekaṃ paramāṇau ceccaitanye'nekacetanāḥ | ghaṭādayaḥ prasajyante pramāṇukathā nahi
— प्रत्येक ; — परमाणु में ; — यदि ; — चैतन्य (हो) ; — अनेक चेतन वाले ; — घट आदि ; — प्रसंग आता है ; — परमाणु की बात ; — है ही नहीं

यदि (आक्षेप:) प्रत्येक परमाणु में चैतन्य (हो), तो घट आदि अनेक चेतन वाले हो जाने का प्रसंग (आता है); (किन्तु हमारे मत में) परमाणु की बात (स्वतन्त्र अन्तिम सत् रूप में) है ही नहीं (अतः यह प्रसंग नहीं आता)।