प्रत्येकं परमाणौ चेच्चैतन्येऽनेकचेतनाः ।
घटादयः प्रसज्यन्ते प्रमाणुकथा नहि ॥२०॥
pratyekaṃ paramāṇau ceccaitanye'nekacetanāḥ |
ghaṭādayaḥ prasajyante pramāṇukathā nahi
यदि (आक्षेप:) प्रत्येक परमाणु में चैतन्य (हो), तो घट आदि अनेक चेतन वाले हो जाने का प्रसंग (आता है); (किन्तु हमारे मत में) परमाणु की बात (स्वतन्त्र अन्तिम सत् रूप में) है ही नहीं (अतः यह प्रसंग नहीं आता)।