घटादेर्भवता ज्ञातमाचैतन्यं कथं यदि ।
चेष्टोन्मेषाद्यभावात्तन्मूर्च्छिते किं करिष्यसि ॥१८॥
ghaṭāderbhavatā jñātamācaitanyaṃ kathaṃ yadi |
ceṣṭonmeṣādyabhāvāttanmūrcchite kiṃ kariṣyasi
यदि (कहो कि) घट आदि का अचैतन्य (जड़ता) तुम्हारे द्वारा जाना (गया है) — तो कैसे? यदि चेष्टा, उन्मेष (आँख खोलना) आदि के अभाव से — तो मूर्च्छित (व्यक्ति, जिसमें ये भी नहीं) के विषय में क्या करोगे (क्या उसे भी जड़ कहोगे)?