The Vision of Śiva· 5.18 / 110

The Vision of Śiva5.18

5.18
घटादेर्भवता ज्ञातमाचैतन्यं कथं यदि । चेष्टोन्मेषाद्यभावात्तन्मूर्च्छिते किं करिष्यसि ॥१८॥
ghaṭāderbhavatā jñātamācaitanyaṃ kathaṃ yadi | ceṣṭonmeṣādyabhāvāttanmūrcchite kiṃ kariṣyasi
— घट आदि का ; — तुम्हारे द्वारा ; — जाना (गया) ; — अचैतन्य (जड़ता) ; — कैसे ; — यदि ; — चेष्टा-उन्मेष आदि के अभाव से ; — तो ; — मूर्च्छित के विषय में ; — क्या करोगे

यदि (कहो कि) घट आदि का अचैतन्य (जड़ता) तुम्हारे द्वारा जाना (गया है) — तो कैसे? यदि चेष्टा, उन्मेष (आँख खोलना) आदि के अभाव से — तो मूर्च्छित (व्यक्ति, जिसमें ये भी नहीं) के विषय में क्या करोगे (क्या उसे भी जड़ कहोगे)?