The Vision of Śiva· 5.15 / 110

The Vision of Śiva5.15

5.15
कर्तृत्वमुपचाराच्चेत् क्रियाया अप्यसत्यता । प्रयोज्यत्वमथोच्येत प्रवृत्तं हि प्रवर्तते ॥१५॥
kartṛtvamupacārāccet kriyāyā apyasatyatā | prayojyatvamathocyeta pravṛttaṃ hi pravartate
— कर्तृत्व ; — उपचार से ; — यदि ; — क्रिया की भी ; — असत्यता ; — प्रयोज्यत्व (अन्य द्वारा प्रवर्त्य) ; — अथवा ; — कहा जाए ; — जो प्रवृत्त (हो चुका) ; — क्योंकि ; — प्रवृत्त होता है

यदि (कहो कि) कर्तृत्व उपचार से (आरोपित) है — तो क्रिया की भी असत्यता (हो जाएगी)। अथवा यदि कहा जाए कि (घट) प्रयोज्य (अन्य द्वारा प्रवर्त्य) है — (तो भी) जो (पहले से) प्रवृत्त (हो चुका) है वही प्रवृत्त होता है (अतः वह स्वयं जानने वाला कर्ता ही है)।