कर्तृत्वमुपचाराच्चेत् क्रियाया अप्यसत्यता ।
प्रयोज्यत्वमथोच्येत प्रवृत्तं हि प्रवर्तते ॥१५॥
kartṛtvamupacārāccet kriyāyā apyasatyatā |
prayojyatvamathocyeta pravṛttaṃ hi pravartate
यदि (कहो कि) कर्तृत्व उपचार से (आरोपित) है — तो क्रिया की भी असत्यता (हो जाएगी)। अथवा यदि कहा जाए कि (घट) प्रयोज्य (अन्य द्वारा प्रवर्त्य) है — (तो भी) जो (पहले से) प्रवृत्त (हो चुका) है वही प्रवृत्त होता है (अतः वह स्वयं जानने वाला कर्ता ही है)।