The Vision of Śiva· 5.16 / 110

The Vision of Śiva5.16

5.16
जानन् कर्तारमात्मानं घटः कुर्यात् स्वकां क्रियाम् । अज्ञाते स्वात्मकर्तृत्वे न घटः सम्प्रवर्तते ॥१६॥
jānan kartāramātmānaṃ ghaṭaḥ kuryāt svakāṃ kriyām | ajñāte svātmakartṛtve na ghaṭaḥ sampravartate
— जानता हुआ ; — अपने को कर्ता ; — घट ; — करता ; — अपनी क्रिया ; — अज्ञात रहने पर ; — अपने आत्म-कर्तृत्व के ; — नहीं ; — घट ; — प्रवृत्त होता

अपने को कर्ता जानता हुआ ही घट अपनी क्रिया करता है; अपने आत्म-कर्तृत्व के अज्ञात रहने पर घट प्रवृत्त नहीं होता।