The Vision of Śiva· 5.11 / 110

The Vision of Śiva5.11

5.11
अथ चेच्चिद्वतामेतद्वक्तुं युक्तं कदाचन । पृथिव्यादेर्हि मूर्तस्य घटादेर्वा न युज्यते ॥११॥
atha ceccidvatāmetadvaktuṃ yuktaṃ kadācana | pṛthivyāderhi mūrtasya ghaṭādervā na yujyate
— अब यदि (आक्षेप) ; — चित्-वान् (चेतन प्राणियों) के विषय में ; — यह ; — कहना ; — युक्त ; — कभी ; — पृथ्वी आदि का ; — किन्तु ; — मूर्त का ; — अथवा घट आदि का ; — युक्त नहीं

अब यदि (आक्षेप:) यह (इच्छा-आनन्द आदि का आरोप) चित्-वान् (चेतन प्राणियों) के विषय में कहना तो कभी युक्त हो; किन्तु मूर्त पृथ्वी आदि का, अथवा घट आदि का (कहना) युक्त नहीं।