अथ चेच्चिद्वतामेतद्वक्तुं युक्तं कदाचन ।
पृथिव्यादेर्हि मूर्तस्य घटादेर्वा न युज्यते ॥११॥
atha ceccidvatāmetadvaktuṃ yuktaṃ kadācana |
pṛthivyāderhi mūrtasya ghaṭādervā na yujyate
अब यदि (आक्षेप:) यह (इच्छा-आनन्द आदि का आरोप) चित्-वान् (चेतन प्राणियों) के विषय में कहना तो कभी युक्त हो; किन्तु मूर्त पृथ्वी आदि का, अथवा घट आदि का (कहना) युक्त नहीं।