The Vision of Śiva· 4.99 / 124

The Vision of Śiva4.99

4.99
तस्मादेवंविधेऽर्थेऽपि युक्तता स्यादिहैक्यतः । तथात्मेच्छावशान्नाक्षग्रामे चेष्टोपपद्यते ॥९९॥
tasmādevaṃvidhe'rthe'pi yuktatā syādihaikyataḥ | tathātmecchāvaśānnākṣagrāme ceṣṭopapadyate
— इसलिए ; — इस प्रकार के विषय में भी ; — युक्तता (संगति) ; — होगी ; — यहाँ ; — एकता से ; — इसी प्रकार ; — आत्मा की इच्छा के वश के बिना ; — नहीं ; — अक्ष-ग्राम (इन्द्रिय-समूह) में ; — चेष्टा ; — उपपन्न होती

इसलिए इस प्रकार के विषय में भी यहाँ एकता से ही युक्तता (संगति) होगी; और इसी प्रकार आत्मा की इच्छा के वश के बिना अक्ष-ग्राम (इन्द्रिय-समूह) में चेष्टा (समन्वित व्यापार) उपपन्न नहीं होती।