The Vision of Śiva· 4.97 / 124

The Vision of Śiva4.97

4.97
क्षणिकत्वेन शब्दानामनभिव्यक्तितोऽपिवा । स्फोटाभिव्यंग्यपक्षे तु तत्रापि क्रमता कथम् ॥९७॥
kṣaṇikatvena śabdānāmanabhivyaktito'pivā | sphoṭābhivyaṃgyapakṣe tu tatrāpi kramatā katham
— क्षणिकत्व के कारण ; — शब्दों के ; — अनभिव्यक्ति के कारण भी ; — अथवा ; — स्फोट के अभिव्यंग्य पक्ष में ; — किन्तु ; — वहाँ भी ; — क्रमता ; — कैसे

चाहे शब्दों के क्षणिकत्व के कारण, अथवा (उनके एक साथ) अनभिव्यक्ति के कारण — और स्फोट के (वर्णों द्वारा) अभिव्यंग्य होने के पक्ष में भी, वहाँ क्रमता (अर्थ-बोध में क्रम) कैसे (हो, एकीकरण-चित् के बिना)?