The Vision of Śiva· 4.89 / 124

The Vision of Śiva4.89

4.89
यावन्न वह्निकलना न योगकलना भवेत् । यावद्वा योगकलना न वह्निकलनाक्षमा ॥८९॥
yāvanna vahnikalanā na yogakalanā bhavet | yāvadvā yogakalanā na vahnikalanākṣamā
— जब तक नहीं ; — अग्नि का कलन (ज्ञान) ; — योग का कलन नहीं ; — होगा ; — अथवा जब तक ; — योग का कलन ; — नहीं ; — अग्नि-कलन में समर्थ

क्योंकि जब तक अग्नि का कलन (ज्ञान) न हो, तब तक योग (सम्बन्ध) का कलन नहीं होगा; और जब तक योग का कलन (न हो), तब तक (धूम-दर्शन) अग्नि के कलन में समर्थ नहीं (— यही दुष्चक्र है)।