बालमूकादिविज्ञानसदृशी किदृशी क्रिया ।
सविकल्पस्य योगित्वाद्यथावस्तु ग्रहः कथम् ॥८२॥
bālamūkādivijñānasadṛśī kidṛśī kriyā |
savikalpasya yogitvādyathāvastu grahaḥ katham
(बौद्ध-मत में निर्विकल्प प्रत्यक्ष) बालक, मूक आदि के विज्ञान के सदृश (होकर) — वह कैसी (सार्थक) क्रिया (उत्पन्न करेगा)? और सविकल्प (ज्ञान) (अर्थ-शून्य शब्दों से) युक्त होने के कारण, यथार्थ-वस्तु का ग्रहण कैसे (हो)?