The Vision of Śiva· 4.77 / 124

The Vision of Śiva4.77

4.77
कथं न देवदत्तस्य यज्ञदत्तवदाख्यया । अत्र संकेतितत्वाच्चेत् संकेतेनात्र किं कृतम् ॥७७॥
kathaṃ na devadattasya yajñadattavadākhyayā | atra saṃketitatvāccet saṃketenātra kiṃ kṛtam
— क्यों न ; — देवदत्त का ; — यज्ञदत्त के समान ; — नाम से ; — यहाँ ; — संकेत के कारण ; — यदि ; — संकेत से ; — यहाँ ; — क्या किया गया

(अन्यथा) देवदत्त का (नाम) यज्ञदत्त के समान (किसी पर भी) क्यों न (लागू हो)? यदि (कहो कि) यहाँ संकेत (संकेतन) के कारण (नियम है) — तो संकेत से यहाँ क्या (वास्तविक सम्बन्ध) किया गया?