The Vision of Śiva· 4.76 / 124

The Vision of Śiva4.76

4.76
तस्मादैक्येन तत्त्वस्य सर्वं तदपि युज्यते । व्यतिरिक्तेन शब्देन मन्त्रेणानतिरेकिणा ॥७६॥
tasmādaikyena tattvasya sarvaṃ tadapi yujyate | vyatiriktena śabdena mantreṇānatirekiṇā
— इसलिए ; — एकता से ; — तत्त्व की ; — सब कुछ ; — वह भी ; — संगत होता है ; — व्यतिरिक्त (पृथक्) शब्द से ; — मन्त्र से ; — अनतिरेकी (अपृथक्)

इसलिए तत्त्व की एकता से ही यह सब भी संगत होता है — (चाहे) व्यतिरिक्त (पृथक्) शब्द से (हो), अथवा अनतिरेकी (अपृथक्) मन्त्र से (बँधने की शक्ति एक तत्त्व की ही है)।