The Vision of Śiva· 4.70 / 124

The Vision of Śiva4.70

4.70
तत्त्वस्यैक्यं विना न स्यादेकस्यैव विरुद्धता । सामान्येन विशेषेण कथमेकस्य योगिता ॥७०॥
tattvasyaikyaṃ vinā na syādekasyaiva viruddhatā | sāmānyena viśeṣeṇa kathamekasya yogitā
— तत्त्व की ; — एकता ; — बिना ; — नहीं हो सके ; — एक की ही ; — विरुद्धता ; — सामान्य के साथ ; — विशेष के साथ ; — कैसे ; — एक की ; — योगिता

(एक) तत्त्व की एकता के बिना एक ही (वस्तु) में विरुद्धता (विरोधी धर्मों का होना) नहीं हो सकता; (अन्यथा) सामान्य और विशेष के साथ एक (पदार्थ) की योगिता कैसे (हो)?