The Vision of Śiva· 4.68 / 124

The Vision of Śiva4.68

4.68
बौद्धस्य चेन्न सामान्यमनुमानं निवर्तते । यथा सुवर्णभाण्डेषु न तथा हेमताम्रयोः ॥६८॥
bauddhasya cenna sāmānyamanumānaṃ nivartate | yathā suvarṇabhāṇḍeṣu na tathā hematāmrayoḥ
— बौद्ध के (मत में) ; — यदि ; — सामान्य नहीं ; — अनुमान ; — निवृत्त होता है ; — जैसे ; — सुवर्ण-भाण्डों में ; — वैसा नहीं ; — सोने और ताँबे के बीच

यदि बौद्ध के (मत में) सामान्य न हो, तो अनुमान ही निवृत्त हो जाएगा — क्योंकि जैसा (एक-रूप प्रत्यय) सुवर्ण-भाण्डों में (होता है), वैसा सोने और ताँबे के बीच नहीं (अतः कोई वास्तविक सामान्य ही पुनरावृत्ति का आधार है)।