The Vision of Śiva· 4.67 / 124

The Vision of Śiva4.67

4.67
सामान्यरूपता वास्ति सा चाभिन्ना विशेषतः । भिन्नाभिन्नात्मकः क्वापि पदार्थस्तादृगिष्यते ॥६७॥
sāmānyarūpatā vāsti sā cābhinnā viśeṣataḥ | bhinnābhinnātmakaḥ kvāpi padārthastādṛgiṣyate
— सामान्य-रूपता ; — अथवा ; — है ; — और वह ; — अभिन्न ; — विशेष से ; — भिन्न-अभिन्न-स्वरूप ; — कहीं भी ; — पदार्थ ; — वैसा ; — माना जाता है

अथवा (यथार्थवादी कहता है कि) सामान्य-रूपता है, और वह विशेष से अभिन्न है; (अतः) कहीं भी पदार्थ वैसा ही — भिन्न-अभिन्न-स्वरूप — माना जाता है।