The Vision of Śiva· 4.66 / 124

The Vision of Śiva4.66

4.66
घटते कथं निमित्तस्य प्राग्योगायोगचोदितैः । योगे जाग्रदवस्थैव तस्मात्सर्वं शिवात्मकम् ॥६६॥
ghaṭate kathaṃ nimittasya prāgyogāyogacoditaiḥ | yoge jāgradavasthaiva tasmātsarvaṃ śivātmakam
— घटित होती है ; — कैसे ; — निमित्त के ; — पहले ; — योग-अयोग से प्रेरितों द्वारा ; — योग (उपस्थिति) में ; — जागृत-अवस्था ही ; — इसलिए ; — सब कुछ ; — शिवात्मक

(जागृति) कैसे घटित हो, यदि (कोई करण) पहले से ही निमित्त के योग-अयोग से प्रेरित हो? (वस्तुतः) निमित्त के योग (उपस्थिति) में जो (अवस्था है) वही जागृत-अवस्था है। इसलिए सब कुछ शिवात्मक है।