घटते कथं निमित्तस्य प्राग्योगायोगचोदितैः ।
योगे जाग्रदवस्थैव तस्मात्सर्वं शिवात्मकम् ॥६६॥
ghaṭate kathaṃ nimittasya prāgyogāyogacoditaiḥ |
yoge jāgradavasthaiva tasmātsarvaṃ śivātmakam
(जागृति) कैसे घटित हो, यदि (कोई करण) पहले से ही निमित्त के योग-अयोग से प्रेरित हो? (वस्तुतः) निमित्त के योग (उपस्थिति) में जो (अवस्था है) वही जागृत-अवस्था है। इसलिए सब कुछ शिवात्मक है।