स्वयम् च न प्रजायेत केनान्येन प्रजन्यते ।
व्यतिरिक्तेन कर्त्राद्या यदि स्युस्ते तदात्मकाः ॥४८॥
svayam ca na prajāyeta kenānyena prajanyate |
vyatiriktena kartrādyā yadi syuste tadātmakāḥ
और (कार्य) स्वयं तो उत्पन्न नहीं होता, (तो फिर) किस अन्य (वस्तुतः पृथक्) द्वारा उत्पन्न किया जाए? यदि कर्ता आदि (कारक) हैं भी, तो वे (भी) तदात्मक (शिव-स्वरूप) हैं।