The Vision of Śiva· 4.48 / 124

The Vision of Śiva4.48

4.48
स्वयम् च न प्रजायेत केनान्येन प्रजन्यते । व्यतिरिक्तेन कर्त्राद्या यदि स्युस्ते तदात्मकाः ॥४८॥
svayam ca na prajāyeta kenānyena prajanyate | vyatiriktena kartrādyā yadi syuste tadātmakāḥ
— और स्वयं ; — उत्पन्न नहीं होता ; — किस अन्य से ; — उत्पन्न किया जाए ; — पृथक् (वस्तु) से ; — कर्ता आदि (कारक) ; — यदि हों ; — वे ; — तदात्मक (शिव-स्वरूप)

और (कार्य) स्वयं तो उत्पन्न नहीं होता, (तो फिर) किस अन्य (वस्तुतः पृथक्) द्वारा उत्पन्न किया जाए? यदि कर्ता आदि (कारक) हैं भी, तो वे (भी) तदात्मक (शिव-स्वरूप) हैं।