The Vision of Śiva· 4.47 / 124

The Vision of Śiva4.47

4.47
तस्मात्स एव भगवान्स्वयमेव प्रकल्पते । तथातथाभावरूपैः सन्नेव परमेश्वरः ॥४७॥
tasmātsa eva bhagavānsvayameva prakalpate | tathātathābhāvarūpaiḥ sanneva parameśvaraḥ
— इसलिए ; — वही ; — भगवान् ; — स्वयं ही ; — रचता है ; — उन-उन भाव-रूपों में ; — सत् रहता हुआ ही ; — परमेश्वर

इसलिए वही भगवान् स्वयं ही (अपने को) रचता है, उन-उन भाव-रूपों में — सत् रहता हुआ ही, परमेश्वर।