बाह्यं रूपादि जल्पन्ति प्रमाणं चोदनैव ते ।
नियमाद्धर्मविषये तस्मान्नैकेन तुल्यता ॥४०॥
bāhyaṃ rūpādi jalpanti pramāṇaṃ codanaiva te |
niyamāddharmaviṣaye tasmānnaikena tulyatā
वे (मीमांसक) रूप आदि को बाह्य कहते हैं, और चोदना (विधि-वाक्य) को ही प्रमाण (मानते हैं), जो नियम से धर्म के विषय में (सीमित) है; इसलिए उस एक बात में (उनके साथ) तुल्यता नहीं।