The Vision of Śiva· 4.40 / 124

The Vision of Śiva4.40

4.40
बाह्यं रूपादि जल्पन्ति प्रमाणं चोदनैव ते । नियमाद्धर्मविषये तस्मान्नैकेन तुल्यता ॥४०॥
bāhyaṃ rūpādi jalpanti pramāṇaṃ codanaiva te | niyamāddharmaviṣaye tasmānnaikena tulyatā
— बाह्य ; — रूप आदि ; — कहते हैं ; — प्रमाण ; — चोदना (विधि-वाक्य) ही ; — वे (मीमांसक) ; — नियम से ; — धर्म के विषय में ; — इसलिए ; — एक (बात) में तुल्यता नहीं

वे (मीमांसक) रूप आदि को बाह्य कहते हैं, और चोदना (विधि-वाक्य) को ही प्रमाण (मानते हैं), जो नियम से धर्म के विषय में (सीमित) है; इसलिए उस एक बात में (उनके साथ) तुल्यता नहीं।