इत्यभ्युपगमोऽस्माकं नैकेनान्यत्र तुल्यता ।
कल्प्या वैशेषिकाणां हि कर्तृतैवेश्वरे स्थिता ॥३८॥
ityabhyupagamo'smākaṃ naikenānyatra tulyatā |
kalpyā vaiśeṣikāṇāṃ hi kartṛtaiveśvare sthitā
ऐसा हमारा अभ्युपगम (स्वीकृत मत) है; और किसी एक बात में भी अन्यत्र (किसी अन्य मत के साथ) तुल्यता कल्पनीय नहीं। क्योंकि वैशेषिकों के (मत में) तो ईश्वर में केवल कर्तृत्व ही स्थित है (हमारे मत में तो सब सत्ता शिव है)।