The Vision of Śiva· 4.38 / 124

The Vision of Śiva4.38

4.38
इत्यभ्युपगमोऽस्माकं नैकेनान्यत्र तुल्यता । कल्प्या वैशेषिकाणां हि कर्तृतैवेश्वरे स्थिता ॥३८॥
ityabhyupagamo'smākaṃ naikenānyatra tulyatā | kalpyā vaiśeṣikāṇāṃ hi kartṛtaiveśvare sthitā
— ऐसा ; — अभ्युपगम (स्वीकृत मत) ; — हमारा ; — एक (बात) में नहीं ; — अन्यत्र (अन्य मत के साथ) ; — तुल्यता ; — कल्पनीय ; — वैशेषिकों के ; — क्योंकि ; — कर्तृत्व ही ; — ईश्वर में ; — स्थित

ऐसा हमारा अभ्युपगम (स्वीकृत मत) है; और किसी एक बात में भी अन्यत्र (किसी अन्य मत के साथ) तुल्यता कल्पनीय नहीं। क्योंकि वैशेषिकों के (मत में) तो ईश्वर में केवल कर्तृत्व ही स्थित है (हमारे मत में तो सब सत्ता शिव है)।