स एवास्ते पुरा तादृक्शक्तिरूपस्वरूपकः ।
स एव कार्यरूपेण भगवानवकल्पते ॥३४॥
sa evāste purā tādṛkśaktirūpasvarūpakaḥ |
sa eva kāryarūpeṇa bhagavānavakalpate
वही (शिव) पहले से ही वैसी शक्ति-रूप अपने स्वरूप वाला होकर स्थित है; और वही भगवान् कार्य-रूप में परिणत होता है।