The Vision of Śiva· 4.34 / 124

The Vision of Śiva4.34

4.34
स एवास्ते पुरा तादृक्शक्तिरूपस्वरूपकः । स एव कार्यरूपेण भगवानवकल्पते ॥३४॥
sa evāste purā tādṛkśaktirūpasvarūpakaḥ | sa eva kāryarūpeṇa bhagavānavakalpate
— वही ; — स्थित है ; — पहले से ; — वैसी शक्ति-रूप अपने स्वरूप वाला ; — वही ; — कार्य-रूप में ; — भगवान् ; — परिणत होता है

वही (शिव) पहले से ही वैसी शक्ति-रूप अपने स्वरूप वाला होकर स्थित है; और वही भगवान् कार्य-रूप में परिणत होता है।