व्यतिरेके न युज्येत विज्ञानं हि घटादिषु ।
मूर्तामूर्तधर्मयोगो घटस्तस्य न गोचरः ॥३०॥
vyatireke na yujyeta vijñānaṃ hi ghaṭādiṣu |
mūrtāmūrtadharmayogo ghaṭastasya na gocaraḥ
यदि (विषय का चित् से) व्यतिरेक हो, तो घट आदि में विज्ञान घटित नहीं होगा। (क्योंकि उसमें) मूर्त-अमूर्त धर्मों का योग (अपेक्षित होगा) — और घट (बाह्य-स्वतन्त्र वस्तु रूप में) उस (ज्ञान) का गोचर नहीं।