The Vision of Śiva· 4.30 / 124

The Vision of Śiva4.30

4.30
व्यतिरेके न युज्येत विज्ञानं हि घटादिषु । मूर्तामूर्तधर्मयोगो घटस्तस्य न गोचरः ॥३०॥
vyatireke na yujyeta vijñānaṃ hi ghaṭādiṣu | mūrtāmūrtadharmayogo ghaṭastasya na gocaraḥ
— व्यतिरेक होने पर ; — घटित नहीं होगा ; — विज्ञान ; — निश्चय ही ; — घट आदि में ; — मूर्त-अमूर्त धर्मों का योग ; — घट ; — उस (ज्ञान) का ; — गोचर नहीं

यदि (विषय का चित् से) व्यतिरेक हो, तो घट आदि में विज्ञान घटित नहीं होगा। (क्योंकि उसमें) मूर्त-अमूर्त धर्मों का योग (अपेक्षित होगा) — और घट (बाह्य-स्वतन्त्र वस्तु रूप में) उस (ज्ञान) का गोचर नहीं।