The Vision of Śiva· 4.25 / 124

The Vision of Śiva4.25

4.25
अज्ञानत्वे परिज्ञाते तदा स्यात्स्वविरोधिता । अज्ञानत्वे स्वभावेन विरोधः केन वार्यते ॥२५॥
ajñānatve parijñāte tadā syātsvavirodhitā | ajñānatve svabhāvena virodhaḥ kena vāryate
— अज्ञानत्व के ; — परिज्ञात होने पर ; — तब ; — होगी ; — स्व-विरोधिता ; — अज्ञानत्व में ; — स्वभाव से ; — विरोध ; — किससे ; — निवारित

जब अज्ञानत्व (स्वयं) परिज्ञात हो जाता है, तब उसमें स्व-विरोधिता हो जाएगी; (और) यदि अज्ञानत्व स्वभाव से (ही ज्ञान का) विरोधी है, तो वह विरोध किससे निवारित किया जाए? (तात्पर्य — 'बाध' का कोई संगत आधार नहीं)।