अज्ञानत्वे परिज्ञाते तदा स्यात्स्वविरोधिता ।
अज्ञानत्वे स्वभावेन विरोधः केन वार्यते ॥२५॥
ajñānatve parijñāte tadā syātsvavirodhitā |
ajñānatve svabhāvena virodhaḥ kena vāryate
जब अज्ञानत्व (स्वयं) परिज्ञात हो जाता है, तब उसमें स्व-विरोधिता हो जाएगी; (और) यदि अज्ञानत्व स्वभाव से (ही ज्ञान का) विरोधी है, तो वह विरोध किससे निवारित किया जाए? (तात्पर्य — 'बाध' का कोई संगत आधार नहीं)।