The Vision of Śiva· 4.26 / 124

The Vision of Śiva4.26

4.26
नैवमत्र स्वभावत्वे विरोधो बाधनात्मकः । स विवेकदृशा ज्ञेयो न स्वभावेन कुत्रचित् ॥२६॥
naivamatra svabhāvatve virodho bādhanātmakaḥ | sa vivekadṛśā jñeyo na svabhāvena kutracit
— ऐसा नहीं ; — यहाँ ; — स्वभाव-रूप होने में ; — विरोध ; — बाधन-रूप ; — वह ; — विवेक-दृष्टि से ; — जानने योग्य ; — नहीं (वस्तु के) स्वभाव से ; — कहीं

यहाँ ऐसा नहीं कि (किसी वस्तु के) स्वभाव-रूप होने में बाधन-रूप विरोध (हो); वह (विरोध) तो विवेक-दृष्टि से जानने योग्य है, कहीं भी (वस्तु के) स्वभाव से नहीं।