तथा सर्वविकल्पानां सत्यरूपत्वदर्शनात् ।
गरुडादिशरीरेषु विषभूतापहारतः ॥२७॥
tathā sarvavikalpānāṃ satyarūpatvadarśanāt |
garuḍādiśarīreṣu viṣabhūtāpahārataḥ
इसी प्रकार समस्त विकल्पों का सत्य-रूपत्व दीख पड़ता है — क्योंकि गरुड आदि के (मन्त्रात्मक) शरीरों में विष और भूत-प्रेत आदि का अपहरण (दूर करना वस्तुतः) होता है।