The Vision of Śiva· 4.27 / 124

The Vision of Śiva4.27

4.27
तथा सर्वविकल्पानां सत्यरूपत्वदर्शनात् । गरुडादिशरीरेषु विषभूतापहारतः ॥२७॥
tathā sarvavikalpānāṃ satyarūpatvadarśanāt | garuḍādiśarīreṣu viṣabhūtāpahārataḥ
— इसी प्रकार ; — समस्त विकल्पों का ; — सत्य-रूपत्व के दर्शन से ; — गरुड आदि के (मन्त्र) शरीरों में ; — विष और भूत-प्रेत आदि के अपहरण से

इसी प्रकार समस्त विकल्पों का सत्य-रूपत्व दीख पड़ता है — क्योंकि गरुड आदि के (मन्त्रात्मक) शरीरों में विष और भूत-प्रेत आदि का अपहरण (दूर करना वस्तुतः) होता है।